Schedules of Indian Constitution

 

भारत के संविधान की अनुसूचियाँ  – 

भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत संविधान है। संविधान में 448 अनुच्छेद  महत्वपूर्ण अनुच्छेद (395), 25 भागों, 12  अनुसूचियों के साथ दुनिया का सबसे लंबा संविधान है।  आज हम बात करेंगे संविधान की अनुसूचियों के विषय में , कई बार प्रमुख  प्रतियोगी परीक्षाओ  में कई बार भारतीय संविधान की अनुसूची से जुड़े प्रश्न पूछ लिए जाते है| इसलिए आपको इसके बारे में अवश्य जानकारी होनी चाहिए।आज हम आपको अपनी पोस्ट के जरिये भारतीय संविधान की 12 अनुसूची के बारे में आपको जानकारी देने जा रहे है।

1.प्रथम अनुसूची  – 

 इसके  अनुसूची के अंतर्गत भारत के 29 राज्य तथा 7 केंद्र शासित प्रदेशो का उल्लेख किया गया है |

2.दूसरी अनुसूची – 

इसमें भारतीय संघ के पदाधिकारियों (राष्ट्रपति ,राज्यपाल ,लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष , राजसभा के सभापति एवं उपसभापति ,विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष,विधान परिषद् के सभापति एवं उपसभापति,उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों और भारत के नियत्रंक महालेखा परीक्षक आदि ) को  भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले वेतन, भत्ते तथा पेंशन का उल्लेख है  किया गया है |

3 . तीसरी अनुसूची – 

इसमें भारत के विभिन्न पदाधिकारियों(राष्ट्रपति , उप राष्ट्रपति , उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों ) को दिलाई जाने वाली शपथ का उल्लेख है मिलता है। 

4. चौथी अनुसूची –

 इसके अंतर्गत राज्यों तथा संघीय क्षेत्रो की राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है । 

5.पाँचवी अनुसूची – 

इसमें अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजाति के प्रशासन व नियंत्रण के बारे में उल्लेख है ।

6. छठी अनुसूची – 

इसमें असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में प्रावधान  का उल्लेख है ।

7. सातवी अनुसूची –

 इसके अंतर्गत केंद्र व राज्यों के बीच शक्तियों के  बंटवारे के बारे में उल्लेख किया गया है। इसके अंतर्गत तीन सूचियां है –

i) संघ की सूची –

 इसके अंतर्गत 100 विषय है| इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केवल केंद्र को है | संविधान के लागू होने के समय इसमे 97 विषय थे |

ii) राज्य सूची – इस सूची में 61 विषय है । जिन पर कानून बनाने का अधिकार केवल राज्य को है। लेकिन राष्ट्रहित से सम्बन्धित मामलों में केंद्र भी कानून बना सकता है | संविधान के लागू होने के समय इसमे 66 विषय थे ।

iii) समवर्ती सूची – इसके अंतर्गत 52 विषय है । इन पर केंद्र व राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।परन्तु कानून के विषय समान होने पर केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून मान्य होता है।राज्य द्वारा बनाया गया कनून केंद्र द्वारा बनाने के बाद  स्वत: समाप्त हो जाता है। संविधान के लागू होने के समय इसमे 47 विषय थे ।

8. आठवी अनुसूची – 

इसमें भारतीय संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त 22 भाषाओं का उल्लेख किया गया है। मूल संविधान में 14 मान्यता प्राप्त भाषाए थी । सन 2004 में चार नई भाषाए मैथली, संथाली, डोगरी और बोडो को इसमें शामिल किया गया ।

9.नौंवी अनुसूची – 

यह अनुसूची प्रथम संविधान संसोधन अधिनियम 1951 द्वारा जोड़ी गयी थी ।  इस अनुसूची में सम्मिलित विषयों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती । लेकिन यदि कोई विषय मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करे तो उच्चतम न्यायालय इस कानून की समीक्षा कर सकता है । अभी तक नौंवी अनुसूची में 283 अधिनियम है, जिनमे राज्य सरकार द्वारा सम्पति अधिकरण का उल्लेख प्रमुख है। 

10. दसवी अनुसूची – 

इसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम 1985 द्वारा मूल संविधान में जोड़ा गया।इस अनुसूची में दल-बदल से संबंधित  कानूनों का उल्लेख किया गया है।

11. ग्यारहवी अनुसूची – 

यह अनुसूची 73वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा मूल संविधान में जोड़ा गया । यह अनुसूची पंचायती राज से सम्बन्धित है, जिसमे पंचायती राज से सम्बन्धित 29 विषय है। 

12. बारहवी अनुसूची – 

यह अनुसूची 74वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा मूल संविधान में जोड़ा गया । इसमें शहरी क्षेत्रों के स्थानीय स्वशासन संस्थानों से सम्बन्धित 18 विषय है ।

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