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Saturday, 5 June 2021

World environment day

विश्व पर्यावरण दिवस

विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने का उद्देश्य बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण पर्यावरण के लिए खतरे के बारे में जागरूकता फैलाना है। पहला विश्व पर्यावरण दिवस 1974 में मनाया गया था, जो पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव को प्रेरित करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है।

5 जून को पूरी दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह पर्यावरण की रक्षा के बारे में जागरूकता अभियान का दिन है। 1972 में मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में घोषित किया गया था।

पर्यावरण हमें जीवनदायी हवा प्रदान करता है, और उन्हें संरक्षित करना आवश्यक है। यह कई जीवित प्रजातियों का घर है और पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाए रखता है। पर्यावरण के लिए कई खतरे हैं, जैसे वनों की कटाई और प्रदूषण, जो न केवल हम बल्कि हमारे आसपास के सभी जीवों को प्रभावित करते हैं।

पर्यावरण के संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए यह ऐसी पहल है। जिसे हर साल 5 जून को मनाया जाता है, सभी जगहों के लोग पर्यावरण के लिए अपना योगदान देने में हिस्सा लेते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के एक भाग के रूप में शुरू की गई एक पहल है।

1972 में मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में घोषित किया गया था। इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दों के साथ पर्यावरण के साथ मानवीय संबंधों पर चर्चा की गई थी। पर्यावरण की रक्षा के लिए नागरिकों का मार्गदर्शन करने के सार्वभौमिक सिद्धांतों पर राष्ट्रों द्वारा सहमति व्यक्त की गई थी। इस सम्मेलन ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम या UNDP के निर्माण का भी नेतृत्व किया।

पहला विश्व पर्यावरण दिवस 1974 में अमेरिका में मनाया गया था। पहले वाले का का उद्देश्य वाक्य ‘केवल एक पृथ्वी’ था। हर साल एक अलग देश विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी करता है, जिसमें वैश्विक मेलों सहित सप्ताह भर के उत्सव होते हैं। प्रतिभागियों में सरकारें, व्यवसाय, साथ ही प्रसिद्ध व्यक्तित्व और नागरिक शामिल हैं। विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया भर में पर्यावरण के सामने आने वाले मुद्दों के बारे में बोलने के लिए हर किसी के लिए एक मंच प्रदान करता है।

  • इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम ‘पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली’ है अर्थात (Ecosystem restoration) इस वर्ष की थीम इकोसिस्टम रेस्टर्शन को 2021-2030 तक संयुक्त राष्ट्र दशक के औपचारिक शुभारंभ को भी चिह्नित करेगा।

पर्यावरण की सुरक्षा की आवश्यकताओं को पूर्णतया वैध रूप में एक परम महत्व का अन्तर्राष्ट्रीय उद्देश्य कहा जा सकता है । आज पर्यावरण की सुरक्षा को सभी सभ्य राज्यो की साझी अवयस्कता तथा सोच के रूप में स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इसी कारण आधुनिक  समय में विश्वस्तरीय तथा सामूहिक पृयासो के द्वारा पर्यावरण की सुरक्षा करना एक प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है।

प्राकृतिक साधनों के गैर-सैद्धांतिक प्रयोग तथा बर्बदी उद्योगीकरण, शहरीकरण, कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग तथा कई एक समस्याओं, जैसे गरीबी, गरीब रहन-सहन, बुरी सार्वजनिक सेहत खुराक की कमी कम रोजगार जोकि लगभग सभी विकासशील देशों की कड़वी वहस्तविकताएं है, ने मिलकर पर्यावरण को दूषित एवं बर्बाद किया है। बर्बादी ने अब मानवता को इस बात के लिए विवश कर दिया है कि ऐसे साधनों और तकनीको को अपनाया जाए जो केवल पर्यावरण की बर्बादी को रोकें, बल्कि जहां तक सम्भव हो फिर से पर्यावरण को स्वस्थ बनाने के लिए अच्छी और चेतनापूर्ण

योजनाएं बनाएं और इनको व्यवहार में लागू भी करें। इन आवश्यकताओं ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्यों के व्यवहार नियमित करने की आवश्यकता को जन्म दिया है ताकि भविष्य में पर्यावरण की बर्बादी को रोका जा सके तथा पर्यावरण के लिए कभी लापरवाही तकनीको को भी अपनाया जा सके। इसी कारण पर्यावरण के दूषित और बर्बाद करने वाले कुछ मुख्य रासायनिक पदार्थों तकनीको जोकि प्रतिदिन के जीवन में प्रयोग होते हैं, का निषेध किए जाने की व्यवस्थाएं की जा रही है।

पर्यावरण की सुरक्षा की धारणा में वातावरण विशेष रूप से विश्व वातावरण को दूषित किये जाने को रोकने की सोच तथा संकल्प शामिल है, अन्तर्राष्ट्रीय कानून के स्वीकृत नियमों में से एक नियमो मैं से एक नियम यह भी है कि कोई भी राज्य तो इस तरह से स्वयं कार्य करे और न ही अपने भू-क्षेत्र को किसी दूसरे द्वारा इस तरह से प्रयोग करने की अनुमति दे जिससे दूसरे राज्यों को कोई हानि पहुंचे। वर्तमान समय में इस नियम का यह अर्थ भी लिया जाता है।

नीति निर्माताओं के समक्ष सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मानव की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करते हुए प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण व विकास की गति में तालमेल बनाए रखना है उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती मांग आधुनिक औद्योगिकीकरण तथा अनियंत्रित वृद्धि दर के कारण विकसित देशों में पर्यावरण की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है लेकिन यहां पर मानवाधिकार द्वारा पर्यावरण के अधिकार पर विचार प्रस्तुत किया जाता है।
•मूलभूत आवश्यकताओं को पूर्ण करने का अधिकार
प्रदूषण मुक्त व पर्यावरण के संरक्षण का अधिकार
इन दोनों परस्पर विरोधी अधिकार का समाधान सतत विकास के उदाहरण में निहित है सतत विकास का अर्थ है ऐसा विकास जिससे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकता की पूर्ति के साथ ही भावी  पीढ़ियों की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाए।
मानव पर्यावरण संबंधी संयुक्त राष्ट्र  स्टॉकहोम सम्मेलन 1972 में मानवीय पर्यावरण संबंधी विषय पर विचार करने के लिए एक सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसका उद्देश्य था एक स्वस्थ  पर्यावरण के लिए मानव समुदाय के अधिकारों के बारे में सभी को जागरूक करना जिसके परिणाम स्वरूप विश्व में पर्यावरण संबंधी मुद्दों को महत्व मिलने लगा तथा पर्यावरण के विषय में अध्ययन अध्यापन का कार्य प्रारंभ हुआ इस सम्मेलन में पर्यावरण के मुद्दों पर अत्यधिक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग देखने को मिला परिणाम यह हुआ कि 100 से अधिक देशों ने पर्यावरण मंत्रालय अथवा अन्य एजेंसियों की शुरुआत की।

पर्यावरण अधिकार उन महत्वपूर्ण मानवाधिकारों का विस्तार हैं जिनकी सभी व्यक्तियों को आवश्यकता है और जिसके वे हकदार हैं। भोजन, स्वच्छ पानी, उपयुक्त आश्रय और शिक्षा के अधिकार के अलावा, एक सुरक्षित और वातावरण होना सर्वोपरि है क्योंकि अन्य सभी अधिकार इस पर निर्भर हैं।

पर्यावरण के प्रति जागरूकता व सम्मान का भाव पैदा किया जाए तथा सभी व्यक्तियों को इसके प्रति जागरूक करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।

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