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Friday, 28 May 2021

Vienna Convention

वियना सम्मेलन –

वियना  सम्मेलन 1990 में  वियना  में विश्व  मानवाधिकार सम्मेलन में उन सभी मानवाधिकारों की पुनः पुष्टि गयी जो  1948 के घोषणापत्र  में शामिल किये गये हैं। 25 जून 1993 को 171 राज्यों प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से मानवाधिकारों  पर विश्व सम्मेलन के कार्ययोजना व वियना घोषणा को अपनाया । इसके अन्तर्गत महिलाओं व बच्चों के मानवधिकार को सार्वभौमिक मानवाधिकारों का एक अभिन्न आन्तरिक और अविभाज्य अंग माना गया | वियना सम्मेलन के निम्नलिखित  प्रावधान है।

# संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) अधिकार पत्र में व्यक्ति की गरिमा पुरुषों व स्त्रियों के समान अधिकारों में आस्था व्यक्त  की गयी है।
# मानवाधिकार की सार्वभौग घोषणा में लिंग सहित सभी प्रकार के भेदभाव के बिना सभी मनुष्य जन्म से स्वतंत्र व समान अधिकार प्राप्त है।
# महिलाओं के विरुद्ध  किया जाने वाला भेदभाव अधिकारों  की समानता व मानवीय गरिमा के प्रति सम्मान का हनन  है  और महिलाओं के प्रति सामाजिक, आर्थिक सांस्कृतिक जीवन की भागीदारी में बाधक

# गरीबी की परिस्थितियों में भोजन स्वास्थ्य, शिक्षा प्रशिक्षण व रोजगार के अवसर व आदि की सुविधा महिलाओं को सबसे कम प्राप्त है।

# समानता व अन्याय  पर आधारित एक नई  अन्तर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थापना से महिलाओं व  पुरुषों के बीच समानता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी ।

# रंगभेद, नस्लवाद उपनिवेशवाद, नवउपनिवेशवाद अतिक्रमण विदेशी कब्जे और प्रभुप्त तथा दूसरे देशो के मामले में हस्तक्षेप की समाप्ति पुरुषों व महिलाओं द्वारा अपने अधिकारों के पूर्ण उपयोग के लिये आवश्यक है।

अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा निशस्त्रीकरण जन समाज के  आत्मनिर्णय व स्वतन्त्रता को कार्यरूप देने राष्ट्रीय प्रभुसत्ता प्रान्तीय अखण्डता के  प्रति सम्मान की  भावना आने से सामाजिक प्रगति को बढ़ावा मिलेगा और इसके परिणामस्वरूप महिलाओं व पुरुषों के बीच – समता स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
# बच्चों के लालन-पालन में माता-पिता की भूमिका या समाज व परिवार में पुरुषों व महिलाओं की पारंपरिक भूमिका में परिवर्तन की आवश्यकता है। माहिलाओं के विरुद्ध एक भाव का अर्थ है किसी प्रकार  के भेदभाव जो लिंग के आधार पर किया है जिसका प्रभाव व उद्देश्य  महिलाओं को राजनीतिक  आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक नागरिक था अन्य क्षेत्र में  मानवाधिकार व मौलिक  स्वतंत्रताओ  का उपयोग  करने में बाधक हो।

#पक्षकार  राज्य महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव  की निंदा करते हैं। व  बिना विलम्ब किये सभी प्रकार के उपायों को  अपनाने के लिए  सहमत है।
# ये देश संविधान तथा और अन्य विधानों  में स्त्री व पुरुष समानता के सिद्धान्त को शामिल करेंगे।

# उचित वैधानिक और अन्य प्रतिबंध सहित अपनायेगे जो भेदभावों का निषेध करेंगे ।

# पुरुषों के समान महिलाओं के अधिकार की वैधानिक अधिकारों की रक्षा सक्षम राष्ट्रीय न्यायाधिकरणी व अन्य सार्वजनिक सुरक्षा करेगें।

#  महिलाओं के विरुद्ध किसी प्रकार के भेदभाव करने वाले कार्य या व्यवहार को अपने से अलग रखेंगे किसी व्यक्ति संगठन उद्यम द्वारा महिलाओं के विरुद्ध किए  जाने वाले किसी भेदभाव को समाप्त करने के लिये उचित उपाय अपनायेंगे ।

#  विद्यमान भेदभावकालीन कानूनों और प्रथाओं व व्यवहारों को समाप्त करके सुधार करने के लिये कानून बनाने सहित सभी उचित उपाय अपनायेगी ।

#  पुरुषों और महिलाओं के बीच वास्तविक समानता बढ़ाने के लिये तथा मातृत्व व संरक्षण के लिये उठाये गये, विशिष्ट उपाय भेदभावपूर्ण नहीं माने जायेंगे।
#  किसी लिंग की हीनता या श्रेष्ठता आधारित पूर्णक्रमिक व परम्परागत व्यवहारों की समाप्त  लिये सांस्कृतिक पद्धतियों में सुधार किया जाएगा ।  तथा बच्चों के पालन पोषण व विकास की पुरुष व स्त्री की साझी जिम्मेदारी माना जाएगा।

# सार्वजनिक पदों को प्राप्त करने का अधिकार उन्हें दिया जायेगा ।

#  राज्य सभी उपयुक्त प्रयास करें जो पुरुषों के समान महिलायें भी बिना विभाव के अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर  सरकारों का प्रतिनिधित्व कर सके ।
# राज्य महिलाओं का पुरुषों के समान अपनी राष्ट्रीयता प्राप्त करने बदलने  या बरकरार रखने की स्वीकृति दे ।

#  राज्य शिक्षा के क्षेत्र में पुरुषों के बराबर महिला के  अधिकार को सुनिश्चित करेगे।

#  सहशिक्षा तथा ऐसे अन्य आवश्यक प्रचारों के जरिए शिक्षा से सभी स्तरों पर सभी रूपों में पुरुषों व महिलाओं की भूमिका की रूढ़िबद्ध अवधारणा को समाप्त  किया जायेगा।

# राज्य छात्राओं  की ” Dropout Rates” को घटाने का प्रयास  करेगा। खेलकूद व शारीरिक शिक्षा में सक्रिय रूप भागीदारी का प्रयास करेगा। परिवारों का स्वास्थ्य व कल्याण नियोजन के विषय में राज्य महिलाओं  के विरुद्ध भेदभाव समाप्त करने में सभी उचित उपाय करेंगे ।

# सामाजिक सुरक्षा का अधिकार विशेषकर सेवानिवृत्त ,बेरोजगारी ,बीमारी ,अपंगता तथा वृध्दावस्था व काम करने की अक्षमता व संवैतनिक छुट्टी का अधिकार होगा ।

# विवाह व मातृत्व आधार पर महिलाओं के विरुद्ध भेषभाव को रोकने के लिये उनके काम का प्रभावकारी अधिकार सुनिश्चित राज्य द्वारा उपाय किया जाएगा।

# राज्य स्वास्थ्य की देखरेख सम्बन्धी विभिन्न सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित करने के लिये सभी उपाय करेगा।
# राज्य समान अधिकार सुनिश्चित करने हेतु आधुनिक और सामाजिक जीवन के अन्य क्षेत्रों में महिलाओं के अधिकार को दिलाने के लिए सभी उपाय करेंगे विशेषकर पारिवारिक लागों का अधिकार, बैंक लक्षण और वित्तीय साख अन्य रूपों के अधिकार
# मनोरंजन की गतिविधियों तथा खेलों  सांस्कृतिक  गतिविधियों में भागीदारी का अधिकार होना चाहिये ।
#  ग्रामीण विकास में भागीदारी सुनिश्चित करने लिये प्रयास किये जायेंगे जैसे- सभी स्तरों पर विकास  योजना व क्रियान्वित करने में भागीदारी हो।
#  स्वास्थ्य ,रक्षा, सुविधाओं की सुलभता सामुदायिक  सुरक्षा कार्यक्रम से सीधे लाभ उठाना व रोजगार व रोजगार के जरिये आर्थिक अफसरों की समान सुलभता सामुदायिक कार्यकलाप में भागीदारी, समुचित रहन सहन का उपयोग विशेषकर आवास  स्वच्छता विद्युल जलापूर्ति परिवाहन वं संचार के मामले में ।

#  राज्य कानून के समक्ष  महिलाओं को पुरुषों के अनुरूप समानता प्रदान करेंगे।

#  राज्य विवाह और पारिवारिक सम्बन्धों से सम्बन्धित सभी मामले में महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव मिटाने हेतु सभी समुचित उपाय अपनाएंगे विशेषतः विवाह करने के बारे में समान अधिकार जीवन साथी चुनने में दोनों की स्वतन्त्रता व पूर्ण सहमति से विवाह करने का समान अधिकार हो ।
#  विवाह के दौरान व भंग होने पर समान अधिकार है एवम बच्चों के बारे में माँ बाप के रूप में समान अधिकार है।

#  पति पत्नी के रूप में समान व्यक्तिगत अधिकार  हो । बाल विवाह वैधानिक रूप से मान्य नहीं होगा | राज्य विवाह  लिये न्यूनतम आयु निर्धारित करने व विवाह पंजीकरण के  विषय में कानून बनाने की कार्यवाही करेगा।   अतः कहा जा सकता है कि महिलाओं के अधिकार नागरिक, राजनीतिक अधिकारों तक सीमित न रहकर आर्थिक सांस्कृतिक अधिकारों  पर व्यापक है ताकि उनके व्यक्तित्व का पूर्ण विकास हो सके।

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