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Monday, 8 March 2021

International women's day

International women’s day 2021 – 

नमस्कार दोस्तों आज  हम इस लेख में  अंतररष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में बात करेंगे ! वर्तमान में महिलाओं ने  हर  क्षेत्र में अपना परचम लहराया है ! महिलाओं ने पुरषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ साथ सहयोगात्मक कार्य में सफलता हासिल कर रहीं हैं ! महिला दिवस एक दिन महिलाओं को इज्जत सम्मान एवं उनके महत्व देकर भूला देने की प्रथा ना बनकर ये वक़्त उनके स्नेह देने उनका ध्यान रखने की है ! इस पितृसत्तत्मक समाज में उन्हें वो ओहदा नहीं मिलता जिनकी वो हकदार हैं  ! अब समय है इस रूढ़िवादी सोचकर को बदलकर उन्हें समानता दिलाने की है !

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्या है ?

 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस  सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए समर्पित है।  महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से स्थापित किया गया दिन लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों पर भी ध्यान देता है। बेशक, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का वैश्विक उत्सव इस बात का प्रतिबिंब है कि महिलाएं कितनी दूर आ गई हैं, जो अभी भी जरूरी है, उसके लिए वकालत और बाधाओं को तोड़ने की कार्रवाई जारी है।  इतिहास की एक सदी से अधिक के साथ, IWD एकता और शक्ति के आसपास केंद्रित एक बढ़ता आंदोलन है।
1800 के अंत और 1900 की शुरुआत में, महिला कार्यकर्ताओं ने समानता के लिए कड़ी लड़ाई लड़ी। ध्यान मुख्य रूप से मतदान के अधिकार और समान काम के लिए समान वेतन हासिल करने पर था। ये दो मुद्दे हैं – महिलाओं की आवाज़ और सरकार में भागीदारी; और लिंग वेतन अंतर – काफी हद तक एक सदी बाद की प्राथमिकताओं में बना रहा।
 
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का 108 साल पुराना एक समृद्ध इतिहास है – इसकी पहली झलक 1909 में हुई थी जब सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने 15,000 महिलाओं को मनाया जिन्होंने लंबे समय तक काम करने, कम वेतन और न्यूयॉर्क शहर में मतदान के अधिकारों की कमी का विरोध किया था।
 मूल रूप से राष्ट्रीय महिला दिवस कहा जाता है, दुनिया भर में स्मारकीय वार्षिक उत्सव (आधिकारिक तौर पर 1911 में मनाया जाता है), लेकिन यह रूस था जिसने अनजाने में 8 मार्च की तिथि निर्धारित की थी। 
मुझे इस बात पर शर्म महसूस होती है कि महिलाओं को उनके हक के लिए लडना पड़े, हमें अपनी पीढ़ियों को यह सीखने की आवश्यकता ना पड़े कि ,” हम किसी से कम नहीं हैं” तभी ये सशक्तिकरण शब्द हटेगा! इस सोच की शुरुवात हमें अपने घर से ही करनी होगी ! जहां पापा मम्मी को बराबर का दर्ज़ा दें उनके निर्णय का स्वागत करें ! वहीं संस्कार घर में आपके बच्चे सीखकर अपने जीवन में आत्मसात करेंगे!
मै महिलावादी (Feminist)  नहीं  हूं बल्कि समानता में यकीन रखती हूं ! महिला पुरुष के कदम  से कदम  मिलाकर चलने में यकीन रखती हूं । महिलाओं के अधिकार के विषय में लड़ने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें श्रेष्ठ साबित करें, स्त्री और पुरूष में समझदारी एव सामंजस्य को बनाए रखना है ।
 ” स्त्री आदिशक्ति का स्वरूप  है  एहसास का दूसरा नाम है !

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