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Wednesday, 10 February 2021

स्वामी विवेकानंद

 

नमस्कार दोस्तो , आज हम आपको सामान्य ज्ञान के ऐसे महत्त्वपूर्ण  व्यक्ति  के बारे में बात करने रहे है जो हर प्रतियोगी परीक्षा में आते  है और हमारे प्रेरणा भी है ,तो आप इन्हें अच्छे से पढ लीजिये और याद कर लीजिये ताकि इनमें से कोई भी प्रश्न परीक्षाओं में आ जाये तो किसी हालत में गलत नहीं होना चाहिये !

​​स्वामी विवेकानन्द जी- 

स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि स्त्रियों की पूजा करके ही सभी राष्ट्र बड़े बने हैं, जिस देश में स्त्रियों की पूजा नहीं होती, वह देश या राष्ट्र कभी बड़ा नहीं बन सका है और भविष्य में कभी बड़ा भी नहीं बन सकेगा। हम देख रहे हैं कि  लक्ष्मी और सरस्वती को मां मानकर पूजने वाले सीता जैसे आदर्श की गाथा घर-घर में गाने वाले “यत्र नार्यस्त पूज्यते रमते तत्र देवता” को हृदय में बसाने वाले भारत में नारी को उचित सम्मान प्राप्त नहीं है। हमारी मानसिकता बदल रही है लेकिन उसकी गति बहुत धीमी है, यदि हम देश में प्रगति चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी सोच को बदल कर नारी जागरण चिंतन और  क्रियाशीलता दिखानी भी होगी। ग्रामीण आदिवासी स्त्रियों की वर्तमान दशा में उद्धार करना होगा, आम जनता को जगाना होगा, तभी तो भारत वर्ष का कल्याण संभव है। अपनी आध्यात्मिकता और दार्शनिकता से हमें जगत को जीतना होगा। संसार में मानवता को जीवित रखने की कोशिश हम युवाओं को ही करनी है, विवेकानंद जी ने भारत को युवा शक्ति कहा था।

स्वामी विवेकानंद अपनी विदेश की यात्रा के दौरान इंग्लैंड भी गए। स्वामी विवेकानंद इंग्लैंड की अपनी प्रमुख शिष्या, जिसे उन्होंने नाम दिया था भगिनी (बहन) निवेदिता। विवेकानंद सिस्टर निवेदिता को महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के लिए भारत लेकर आए थे। स्वामी जी की प्रेरणा से सिस्टर निवेदिता ने महिला जागरण के लिए एक “गर्ल्स स्कूल कलकत्ता “में खोला। वह घर-घर जाकर गरीबों के घर लड़कियों को स्कूल भेजने की गुहार लगाने लगीं। विधवाओं और कुछ गरीब औरतों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सिलाई, कढ़ाई आदि स्कूल से बचे समय में सिखाने लगीं। जाने-माने भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बोस की बहन निवेदिता ने काफी इस  कार्य में मदद की, न केवल धन से बल्कि विदेशों में अपने रिश्तों के जरिए। वर्ष 1899 में कोलकाता में प्लेग फैलने पर निवेदिता ने जमकर गरीबों की मदद की।

धर्म महासभा के अंतिम अधिवेशन में स्वामी जी का भाषण – 

 स्वामी जी का सबको स्वीकार करने वाला यह विश्व बंधुत्व का संदेश, विश्व भर को मार्ग दिखाता है, जो मानव समाज को कटुता से बाहर निकालता है और सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार के तौर पर देखने की दृष्टि प्रदान करता है। 

 हमें स्वामी जी के धर्म महासभा के अंतिम अधिवेशन में दिए गए भाषण के इन शब्दों को भी याद करना चाहिए। ईसाई को हिन्दू या बौद्ध नहीं हो जाना चाहिए और हिन्दू अथवा बौद्ध को ईसाई ही, पर हां, प्रत्येक को चाहिए कि यह दूसरों सार-भाग को आत्मसात करे पृष्टि-लाभ करे और अपने वैशिष्ट्य की रक्षा करते हुए अपनी निजी वृद्धि के नियम के अनुसार कार्य करता रहे ।

उन्होंने समाज की कपट , दंभ, क्रूरता, आडम्बर और अनाचार की  आलोचना करने में संकोच नहीं किया। इन्हीं कारण वे तत्कालीन युवा पीढ़ी के आकर्षण का केन्द्र बने रहे। इसमें काई शक नहीं कि वे आज भी अधिकांश युवाओं के आदर्श हैं। उनकी हमेशा यही शिक्षा रही कि आज के युवक को शारीरिक प्रगति से ज्यादा आंतरिक प्रगति की जरूरत है। वे युवकों में जोश भरते हुए कहा करते थे कि “उठो मेरे शेरों इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो” वे एक बात और कहते थे कि “जो तुम सोचते हो वह हो जाओगे” ऐसी ही कुछ प्रेरणाएं हैं जो आज भी युवकों को ऊर्जा प्रदान करती है, पथ दिखाती है और जीने का दर्शन प्रदान करती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आत्मनिर्भर भारत बनाने की ओर आगे बढ़ रहे हैं तो कहीं न कहीं उसका आधार  विवेकानंद की शिक्षाएं एवं प्रेरणाएं ही हैं।

स्वामी जी ने अनुभव किया कि समाज सेवा केवल संगठित अभियान और ठोस प्रयासों द्वारा ही संभव है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए स्वामी विवेकानंद ने 1897 में रामकृष्ण मिशन की शुरुआत की और अध्यात्म, वैज्ञानिक जागरुकता एवं आर्थिक समृद्धि के लक्ष्य को हासिल करने के लिए  विचारों का प्रसार लोगों में किया। अगले दो वर्षों में बेलूर में गंगा के किनारे रामकृष्ण मठ की स्थापना की। 

विवेकानंद जी ने युवाओं को जगाने के लिए एक बार फिर जनवरी 1899 से दिसम्बर 1900 तक पिश्चमी देशों की यात्रा की। स्वामी विवेकानंद का देहांत 4 जुलाई, 1902 को कलकत्ता के पास बेलूर मठ में  हुआ था। स्वामी जी देह रूप में हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके अध्यात्म, वैज्ञानिक जागरुकता एवं आर्थिक समृद्धि के विचार युगों-युगों तक मानव जाति का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

12 जनवरी को विवेकानंद जी के जन्म दिवस  पर हर साल “युवा दिवस” के रूप में मनाया जाता है।

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