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Wednesday, 23 December 2020

Election commission of India (निर्वाचन आयोग)

 

निर्वाचन आयोग की संरचना –

भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के उद्देश्य से भारतीय संविधान में निर्वाचन आयोग स्थाई एवं स्वतंत्र निकाय का प्रावधान किया गया है। भारतीय संविधान के भाग 15 में अनुच्छेद 324 से 329- क तक निर्वाचन आयुक्त से संबंधित प्रावधान का  वर्णन है।
संविधान में निर्वाचन आयोग के कार्यों में शक्तियों का वर्णन मिलता है परंतु जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 तथा जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 के द्वारा निर्वाचन आयोग की शक्तियों को विस्तार प्रदान किया गया।भारत में पारदर्शी और निष्पक्ष शासन के लिए चुनाव आयोग की आवश्यकता पड़ी इसलिए इसकी स्थापना 25 जनवरी 1951 में की गई थी।
निर्वाचन आयोग अखिल भारतीय संस्था मानी जाती है क्योंकि यह संसद एवं राज्य विधानमंडल दोनों के चुनाव के लिए समान रूप से उत्तरदाई होती है परंतु राज्यों में होने वाले पंचायत व निगम चुनाव सेचुनाव आयोग का कोई संबंध नहीं है इसके लिए भारत के संविधान में अलग से राज्य निर्वाचन आयोग( state election commission) की व्यवस्था की गई है।

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार-

संविधान के अनुच्छेद 326 में भारत के प्रत्येक वयस्क नागरिकों को (voting rights )मत देने का अधिकार प्रदान करता है शर्त यह है कि वह भारतीय नागरिक किसी भी आपराधिक मामले में दोषी ठहराया गया हो तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ ना हो।
# वर्ष 1928 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने साइमन कमीशन से सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को लागू करने की मांग की थी।
#डॉक्टर अंबेडकर के अनुसार चुनाव समाज के सबसे पीड़ित वर्ग के हाथों में हथियार है तथा मताधिकार उन्हें राजनीतिक और कानूनी समानता प्रदान करने में प्रमुख भूमिका निभाएगा।
#1931 के कराची अधिवेशन में कांग्रेस ने राजनीतिक समानता की मांग की थी।

निर्वाचन आयोग की संरचना-

निर्वाचन आयोग तीन सदस्यीय निकाय है जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा दो अन्य सदस्य होते हैं। सभी सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। वर्ष 1989 तक चुनाव आयोग एकल सदस्य संस्था थी किंतु वर्ष 1989 में इस संस्था को तीन सदस्य बनाया गया पुनः अगले वर्ष इससे एक सदस्यीय बना दिया गया इसके बाद वर्ष 1993 में इसे पुनः तीन सदस्यीय कर दिया गया।
*निर्वाचन आयोग एक सामाजिक संस्था है जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त की एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त का स्थान एक समान होता है, मुख्य निर्वाचन आयुक्त की प्राथमिकता केवल इतनी है कि वह निर्वाचन आयोग की बैठक में अध्यक्षता करता है मुख्य निर्वाचन आयुक्त व अन्य निर्वाचन आयुक्त के पास समान शक्तियां होती हैं ,तथा उनके वेतन भत्ते वह दूसरे लाभ  भी एक समान होते हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होते हैं।
*जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त व दो निर्वाचन आयुक्तों के बीच किसी विषय पर मतभेद उत्पन्न होता है तो आयोग बहुमत के आधार पर निर्णय करता है  ।

निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल एवं  पद से हटाने की प्रक्रिया –

.निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल अधिकतम 6 वर्ष का होता है तथा वह 65 वर्ष की उम्र तक इस पद पर बने रह सकते हैं।

.वह किसी भी समय त्यागपत्र दे सकते हैं तथा उन्हें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व भी राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।

. मुख्य निर्वाचन आयुक्त स्वत: निर्णय लेकर अन्य निर्वाचन आयुक्तों को हटा नहीं सकते हैं।
. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
. भारत मे निर्वाचन आयुक्त राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण नहीं करता है । राष्ट्रपति ,मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सहमति के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्त को पद से नहीं हटा सकते  है ।

निर्वाचन आयोग के कार्य-

चुनाव से संबंधित सभी प्रकार की व्यवस्था करवाना निर्वाचन आयोग का प्रमुख कार्य है।
1. चुनाव तिथियों का निर्धारण करना।
2. चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन एवं सीमांकन करना।
3. मतदाता सूचियां तैयार करवाना ।
4. आचार संहिता तैयार करना।
5. राजनीतिक दलों का पंजीकरण करना।
6. उम्मीदवारों के चुनाव खर्च की सीमा का विवरण ।
7. चुनाव के समय आदर्श चुनाव आचार संहिता का पालन करवाना।
8 राजनीतिक दलों को चुनाव चिन्ह का आवंटन करना।
9. निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव करवाना।
10. चुनावी खर्चों की निगरानी रखना।
11. चुनाव चिन्हों का आवंटन करना।
12. चुनाव के तिथि निर्धारित करना।
13. राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति का चुनाव करवाना।
14.. मतदाता पहचान पत्र तैयार करवाना।
15. लोकसभा ,राज्यसभा ,विधानसभा, विधानपरिषद सदस्यों का चुनाव करवाना ।

Note-

*25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
*पहले निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन थे।
*भारत की प्रथम महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त वी एस रामादेवी थी।
*61 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1988 के द्वारा मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई और इसे 1989 से लागू कर दिया गया।
*वोट देने पर उंगली में जो स्याही लगाई जाती हैं उसे सिल्वर नाइट्रेट कहते हैं।
* ईवीएम का प्रयोग करने वाला पहला राज्य केरल(पारूर)  1982 था ।

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