मोहम्मद बिन तुगलक (तुगलक वंश)

मोहम्मद बिन तुगलक(1326-1351)

मोहम्मद बिन तुग़लक़

मोहम्मद बिन तुगलक का वास्तविक नाम या बचपन का नाम  जौना खां था ।

मोहम्मद बिन तुगलक ने (अल सुल्तान जिलेेल्लाह) की उपाधि धारण की। मोहम्मद बिन तुगलक राजत्व के देवीय सिद्धांत पर विश्वास  करते थे । मोहम्मद बिन तुगलक उलेमा और अमीर वर्ग के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करते थे। इस वजह से उलेमा तथा अमीर मोहम्मद तुगलक से क्रोधित रहनेे लगे ।

मोहम्मद ने मिश्र के खलीफा को दिल्ली आमंत्रित किया व दिल्ली में जागीर प्रदान की।

जनता के साथ संबंध-

1.हिंदुओं के साथ मिलकर होली मनाई।
2. जैन धर्म के संत जिन प्रभा सूरी के साथ अच्छे संबंध थे।
3. इस्लाम /सूफी संत / से अच्छे संबंध थे किंतु चिश्ती संत (नसीरुद्दीन चिराग देहलवी से अच्छे संबंध नहीं थे)

इब्नबतूता का भारत आगमन-

*1333 मे इब्नबतूता मोहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया था।
इब्नबतूता मोरक्को (Africa)का निवासी था जिसने रेहला नामक किताब लिखी। इब्नबतूता 8 वर्ष दिल्ली में रहा तथा मोहम्मद ने उसे काजी का पद दिया ।मोहम्मद बिन तुगलक ने 1341 में इब्नबतूता को चीन भेज दिया।
मोहम्मद बिन तुगलक ने सर्वाधिक राज्य का विस्तार किया। 1336 में विजयनगर साम्राज्य का विस्तार किया । 1347 में बहमनी साम्राज्य की स्थापना मोहम्मद बिन तुगलक के काल में हुई। इस साम्राज्य की स्थापना अलाउद्दीन हसन ने की थी जिसको हसन गंगू के नाम से भी जाना जाता है। 1351 में मोहम्मद बिन तुगलक की सिंध (थट्टा में मृत्यु हो गई।
*इतिहासकार बदायूंनी ने मोहम्मद की मृत्यु के पश्चात कहा कि राजा को प्रजा से व प्रजा को राजा से मुक्ति मिल गई।
**इतिहास में इन्हें पागल शासक के रूप में जाना जाता है यह 5 परियोजनाएं लाये जो की असफल हो गई।

सिक्कों का चलन-

मोहम्मद बिन तुगलक ने दो प्रकार के सिक्के चलाए जिन्हें दिनार (स्वर्ण मुद्रा) एवं अदली (चांदी की मुद्रा )के नाम से जाना गया।

स्थापत्य-

1.आदिलाबाद के किले का निर्माण के शासनकाल में हुआ था।
2. जहांपनाह (दिल्ली)
3. सतपुला इमारत  (दिल्ली)
4. निजामुद्दीन औलिया का मकबरा मोहम्मद बिन के समय काल में बना था।
तुगलक वंश में सबसे पढ़ा-लिखा शासक होने के बावजूद भी यह असफल घोषित हुए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *