जलवायु परिवर्तन

विश्व  के औसत तापमान  में वृद्धि की घटना को  ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है। विश्व का औसत तापमान लगभग 15.5C सेंटीग्रेट है। इस औसत  तापमान में अपेक्षाकृत वृध्दि होने से वैश्विक स्तर पर तापीय वृद्धि की समस्या होती है जिसे ग्लोबल  वार्मिंग कहा जाता है। पृथ्वी की उत्पत्ति के बाद प्राकृतिक कारणों से हिमयुग और अन्तरहिम युग आते रहे हैं। हिमयुग ग्लोबल पुलिग (वैश्विक शिथिलन) और अन्तरहिम युग ग्लोबल वार्मिंग का ही प्रतीक है इस दृष्टि से वर्तमान युग ( होलोसीन) युग एक अन्तरहिम युग है जो ग्लोबल वार्मिंग का समय है।
होलोसीन काल में औसत तापमान में वृद्धि स्वाभाविक है लेकिन वर्तमान में मानव प्रेरित या मानवजनित ग्लोबल वार्मिंग मानव की चिन्ता का विषय है पृथ्वी पर ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण वायुमण्डल में स्थित ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा  में वृद्धि होना है।
ग्रीन हाउस प्रभाव => पृथ्वी के वायुमंडल में कुछ जैसे पायी जाती है जो प्रत्यक्षतः  सौर्य उर्जा को अवशोषित नहीं करती है।

पृथ्वी द्वारा उत्सर्जित पार्थिव विकिरण को अवशोषित करती है जिससे वायुमंडल के तापमान में वृद्धि होती है। इन गैसों को वायुमण्डल के ग्रीन हाउस गैस कहते है और वायुमण्डल के गर्म होने की इस प्रक्रिया को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं।

• ग्रीन हाउस की अवधारणा ठंडे प्रदेशों के ग्रीन हाउस से ली गयी है। जहाँ शीशे का घर बनाकर कृत्रिम तरीके से तापमान आर्द्रता की दशाओं में वनस्पतियों को पृथ्वी के वायुमण्डल उगाया जाता है।
पृथ्वी के वायुमंडल में स्थित ग्रीन हाउस जैसे पार्थिव विकिरण के लिए अवरोध का कार्य करती हैं।

जब इन जैसो की मात्रा में औसत से अधिक वृद्धि हो जाती है तब वायुमंडल में भी और वृद्धि हो जाती है। यह घटना ग्लोबल वार्मिग कहलाती है।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण => ग्लोबल वार्मिंग के लिये उत्तरदायी प्रमुख ग्रीन हाउस गैस CO2 है। इसे वर्तमान में (55-60 %) उत्तरदाई माना जाता है।

• CHu मीथेन, दूसरा प्रमुख उत्तरदायी गैस है यह लगभग (15-20%) उत्तरदायी है। CFC क्लोरो फलोरो तीसरा प्रमुख रसायनिक गैस है।

Note  – ग्लोबल वामिगे के लिये हानिकारक प्रभाव की दृष्टि से CO2 की तुलना में मीथेन Ch4 लगभग 21गुना और मीथेन की तुलना में  3500-3700 गुना अधिक नुकसानदायक है। औद्योगीक क्रान्ति के पहले CO2 की माता 280 PPM, (Part Per Million) मात्रा थी जो वर्तमान – में बढ़कर औद्योगिक 380 PPM हो चुकी है। क्रान्ति के बाद विश्व के तापमान में
लगभग 2 से 3C की वृद्धि हो चुकी है। •IPCC के नवीनतम रिपोर्ट (2013-14) के अनुसार यदि विश्व में ग्रीन हाउस गैंस की मात्रा में वर्तमान दर से वृद्धि होती रहे तब सदी के अन्त तक विश्व के औसत तापमान में 48°C तक प्रसिद्ध हो सकती है।
• ग्लोबल वार्मिंग के लिये उत्तरदायी देश  रुस  अमेरिकी,’प० यूरोपीय देश जापान जैसे विकसित देश है। USA, कार्बन डाइऑक्साइड का सबसे बड़ा उत्सर्जक देश रहा है।
वर्तमान में CO2 के उत्सर्जन में चीन प्रथम USA II, भारत III स्थान पर है।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण  –

मानव जनित  कारण –
CO2,CO, Ch4, CFC,SO2   वन विनाश, पशुचारण, खनन, औद्योगिकरण नगरीकरण,मोटर वाहन, ईंधन का दहन यंत्र एवं मशीन से उत्पन्न उत्सर्जन

प्राकृतिक कारण – दलदली भूमि से  Ch4 का उत्सर्जन , धान की कृषि से का CH4  उत्सर्जन

जुगाली करने वाले जानवरों से Ch4 उत्सर्जन, ज्वालामुखी विस्फोट , बर्फ के पिघलने से Ch4 का उत्सर्जन
ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम -> विश्व जलवायु में परिवर्तन /अस्थिरता
•तापीय वृद्धि
•जल संकट / जलाभाव की समस्या, बाढ़, सूखा अतिवृष्टि, अनावृष्टि, कृषि संकट, खादान्न संकट जैविक संकट जोतों का नष्ट होना।

•जैवविविधता हास संकट
• परिस्थितिकी असंतुलन

• बर्फ का पिछलना समुद्र तल का उपर द्वीप एवं तटीय क्षेत्रों का डूब जाना आना

मानव विस्थापन / पुर्नवास की समस्या

→ स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं

– ग्लोबल कुलिंग